पहाड़ की आत्मा • जनता की आवाज़ • संघर्ष की पहचान
उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल , गठन 1979 में उत्तराखंड राज्य की स्थापना के मूल उद्देश्य—पर्वतीय अस्मिता, स्थानीय अधिकार और संतुलित विकास—को साकार करने के लिए हुआ। उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने की लंबी और संघर्षपूर्ण यात्रा में इस दल की विचारधारा और जनआंदोलनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।िया गया था।
उत्तराखंड क्षेत्र के लोगों ने वर्षों तक प्रशासनिक उपेक्षा, रोजगार के सीमित अवसर, पलायन, कमजोर बुनियादी ढांचे और पहाड़ी क्षेत्रों की विशेष समस्याओं के समाधान के लिए आवाज़ उठाई। अनेक जनआंदोलनों, धरना-प्रदर्शनों और व्यापक जनसमर्थन के बाद अलग राज्य की मांग मजबूत हुई। अंततः 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड एक नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
इस संघर्ष के मूल में यह भावना थी कि स्थानीय जरूरतों के अनुरूप नीतियां बनें, युवाओं को रोजगार मिले, किसानों और सैनिक परिवारों को सम्मान और सुरक्षा मिले, तथा पर्वतीय क्षेत्रों का समुचित विकास हो।
उत्तराखंड राज्य लंबे संघर्षों के बाद बना, लेकिन जनता की उम्मीदों के अनुरूप विकास की रफ्तार दिखाई नहीं दी।
समय के साथ लोगों में यह भावना मजबूत हुई कि राष्ट्रीय दलों की सरकारें उत्तराखंड की विशेष परिस्थितियों को समझने में सफल नहीं रहीं।
कुछ आपराधिक घटनाओं और प्रशासनिक निष्क्रियता ने भी जनता के विश्वास को कमजोर किया। जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी से असंतोष बढ़ता गया।
इन्हीं परिस्थितियों में एक मजबूत क्षेत्रीय नेतृत्व की आवश्यकता फिर महसूस की जाने लगी।
उत्तराखंड क्रांति दल ने पुनः सक्रिय होकर राज्य के सम्मान, स्वाभिमान और विकास के लिए जनसेवा का संकल्प लिया है।
उत्तराखंड की पहचान और स्वाभिमान की रक्षा हमारा उद्देश्य
सरकारी नौकरियों और संसाधनों में उत्तराखंड के युवाओं को प्राथमिक अधिकार।
भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार योजनाओं का निर्माण।
गांवों में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार।
जवाबदेह प्रशासन और भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था।
उत्तराखंड की भाषा, संस्कृति और परंपराओं का सम्मान।
स्थानीय संसाधनों पर स्थानीय लोगों का अधिकार सुनिश्चित करना।
समान और सशक्त शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं की मांग।
शराब के खिलाफ़ जनआंदोलन और स्वस्थ समाज के लिए संघर्ष।