पहाड़ की आत्मा • जनता की आवाज़ • संघर्ष की पहचान
उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) का इतिहास सत्ता की राजनीति का नहीं, बल्कि पहाड़ की अस्मिता, संघर्ष और बलिदान की गाथा है। यह दल उस समय खड़ा हुआ जब उत्तराखंड की पहचान, संसाधन और अधिकार लगातार कुचले जा रहे थे।
1979 में उत्तराखंड क्रांति दल की स्थापना उस समय हुई, जब पहाड़ को केवल संसाधन लूट का क्षेत्र माना जा रहा था। UKD ने सबसे पहले अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को राजनीतिक मंच दिया।
जब बाकी दल चुप थे, तब UKD ने सड़क से सदन तक उत्तराखंड की पहचान की लड़ाई लड़ी।
उत्तराखंड क्रांति दल की स्थापना — अलग राज्य की पहली संगठित राजनीतिक मांग।
जल-जंगल-जमीन, शराब विरोध, पलायन और रोजगार के मुद्दों पर व्यापक आंदोलन।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन — गोलीकांड, लाठीचार्ज और दमन के बीच UKD अग्रिम पंक्ति में।
उत्तराखंड राज्य का गठन — लेकिन UKD ने चेताया कि राज्य बनने से संघर्ष खत्म नहीं होगा।
शराब नीति, भूमि कानून, पलायन, शिक्षा-स्वास्थ्य और संसाधन संरक्षण पर निरंतर संघर्ष।
UKD ने कभी समझौते की राजनीति नहीं की, हमेशा जनता के साथ खड़ा रहा।
UKD सत्ता से नहीं, जनता की ताकत से चलता है — गाँव, खेत और पहाड़ से।
“उत्तराखंड क्रांति दल का इतिहास बताता है — यह दल सत्ता के लिए नहीं, उत्तराखंड के अस्तित्व के लिए बना है।”