उत्तराखंड क्रांति दल का इतिहास

पहाड़ की आत्मा • जनता की आवाज़ • संघर्ष की पहचान

उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) का इतिहास सत्ता की राजनीति का नहीं, बल्कि पहाड़ की अस्मिता, संघर्ष और बलिदान की गाथा है। यह दल उस समय खड़ा हुआ जब उत्तराखंड की पहचान, संसाधन और अधिकार लगातार कुचले जा रहे थे।

UKD Foundation

1979 – एक ऐतिहासिक शुरुआत

1979 में उत्तराखंड क्रांति दल की स्थापना उस समय हुई, जब पहाड़ को केवल संसाधन लूट का क्षेत्र माना जा रहा था। UKD ने सबसे पहले अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को राजनीतिक मंच दिया।

जब बाकी दल चुप थे, तब UKD ने सड़क से सदन तक उत्तराखंड की पहचान की लड़ाई लड़ी।

संघर्ष की समयरेखा

1979

उत्तराखंड क्रांति दल की स्थापना — अलग राज्य की पहली संगठित राजनीतिक मांग।

1980–1990

जल-जंगल-जमीन, शराब विरोध, पलायन और रोजगार के मुद्दों पर व्यापक आंदोलन।

1994

उत्तराखंड राज्य आंदोलन — गोलीकांड, लाठीचार्ज और दमन के बीच UKD अग्रिम पंक्ति में।

2000

उत्तराखंड राज्य का गठन — लेकिन UKD ने चेताया कि राज्य बनने से संघर्ष खत्म नहीं होगा।

2000–वर्तमान

शराब नीति, भूमि कानून, पलायन, शिक्षा-स्वास्थ्य और संसाधन संरक्षण पर निरंतर संघर्ष।

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आंदोलन की राजनीति

UKD ने कभी समझौते की राजनीति नहीं की, हमेशा जनता के साथ खड़ा रहा।

जनता का दल

UKD सत्ता से नहीं, जनता की ताकत से चलता है — गाँव, खेत और पहाड़ से।

“उत्तराखंड क्रांति दल का इतिहास बताता है — यह दल सत्ता के लिए नहीं, उत्तराखंड के अस्तित्व के लिए बना है।”
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