Er. श्री सुरेन्द्र कुकरेती

उत्तराखंड क्रांति दल • केन्द्रीय अध्यक्ष

लिंग : Male

जन्म तिथि : 07 Jul 1954

जन्म स्थान : पौड़ी जिले के यमकेश्वर के गांव मागाथा

क्षेत्र : यमकेश्वर

सक्रिय वर्ष : 2046

स्थिति : Active

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जीवन परिचय

इं. श्री सुरेन्द्र कुकरेती उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठतम और अग्रणी नेताओं में से एक हैं। वे वर्ष 1980 से निरंतर पार्टी से जुड़े हुए हैं और उत्तराखंड राज्य की अवधारणा, क्षेत्रीय अस्मिता तथा संतुलित विकास के लिए सक्रिय रूप से कार्य करते रहे हैं। चार दशकों से अधिक के उनके राजनीतिक एवं सामाजिक अनुभव ने उन्हें संगठन के भीतर एक मजबूत, अनुशासित और वैचारिक नेतृत्व के रूप में स्थापित किया है।

नवंबर 2025 में उन्हें सर्वसम्मति से उत्तराखंड क्रांति दल का केन्द्रीय अध्यक्ष चुना गया। यह चयन उनके लंबे संगठनात्मक अनुभव, समर्पण और साफ-सुथरी सार्वजनिक छवि को देखते हुए किया गया। पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि उनके नेतृत्व में यूकेडी नई ऊर्जा और स्पष्ट दिशा के साथ आगे बढ़ेगी।

श्री कुकरेती पेशे से एक इंजीनियर हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि होने के कारण वे विकास की योजनाओं को व्यवहारिक दृष्टिकोण से देखने और लागू करने में विश्वास रखते हैं। उनका मानना है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए योजनाएँ स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, संसाधनों और जनसंख्या संरचना को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। वे पारदर्शी प्रशासन, सशक्त भू-कानून, रोजगार सृजन, स्वरोजगार, कृषि एवं पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के पक्षधर हैं।

सार्वजनिक जीवन में उनकी पहचान एक अनुशासित, स्पष्टवादी और जमीनी नेता के रूप में रही है। संगठन विस्तार, युवा नेतृत्व को अवसर देने और राज्य आंदोलन की मूल भावना को जीवित रखने पर वे विशेष जोर देते हैं। उनके नेतृत्व में उत्तराखंड क्रांति दल वर्ष 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में मजबूती से अपनी दावेदारी प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहा है।

जनता के नाम संदेश

इं. श्री सुरेन्द्र कुकरेती का स्पष्ट मानना है कि उत्तराखंड का विकास उसकी भौगोलिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विशिष्टताओं को ध्यान में रखकर ही संभव है। उनका विज़न एक ऐसे उत्तराखंड का निर्माण करना है जो आत्मनिर्भर, पर्यावरण-संवेदनशील और युवाओं के लिए अवसरों से परिपूर्ण हो। वे विकास और संरक्षण के संतुलन को राज्य की प्रगति का मूल आधार मानते हैं।

उनका संदेश है कि उत्तराखंड केवल प्राकृतिक संसाधनों का भंडार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत और जनशक्ति का भी धनी प्रदेश है। इसलिए जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय लोगों का अधिकार सुनिश्चित करते हुए नीतियाँ बनाई जानी चाहिए। वे सख्त भू-कानून, पारदर्शी प्रशासन और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन के पक्षधर हैं।

श्री कुकरेती रोजगार सृजन को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखते हैं। उनका मानना है कि पहाड़ से पलायन रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर उद्योग, स्वरोजगार, कृषि, बागवानी, जड़ी-बूटी, और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक है। तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना उनके विज़न का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उनका यह भी संदेश है कि क्षेत्रीय राजनीतिक सोच को मजबूत किए बिना उत्तराखंड की मूल समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। वे संगठनात्मक मजबूती, जनसंवाद और लोकतांत्रिक भागीदारी के माध्यम से एक सशक्त, आत्मगौरव से भरे और विकसित उत्तराखंड के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं।


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