इंद्रमणि बडोनी

(जन्म 24 Dec 1925 – मृत्यु:18 Jul 1999 )

इंद्रमणि बडोनी, जिन्हें “उत्तराखंड के गांधी” के नाम से जाना जाता है, का जन्म 24 दिसंबर 1925 को टिहरी गढ़वाल रियासत के अखोड़ी गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम सुरेशानंद और माता का नाम कलदी देवी था। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने टिहरी क्षेत्र में प्राप्त की तथा आगे की पढ़ाई नैनीताल और देहरादून में पूरी की। उन्होंने 1949 में डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। मात्र 19 वर्ष की आयु में उनका विवाह सुरजी देवी से हुआ। जीविका की तलाश में वे कुछ समय के लिए बंबई गए, परंतु शीघ्र ही अपने पहाड़ लौट आए। उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत 1953 में तब हुई जब प्रसिद्ध गांधीवादी कार्यकर्ता Mirabehn (मीरा बहन) उनके गाँव आईं और उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला।

1961 में इंद्रमणि बडोनी ग्राम प्रधान चुने गए और बाद में जखोली विकासखंड के प्रमुख बने। 1967 में वे देवप्रयाग क्षेत्र से पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित हुए। 1969 में वे कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में पुनः विधानसभा पहुंचे। 1977 में जनता लहर के समय उन्होंने लखनऊ विधानसभा से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और भारी मतों से विजय प्राप्त की, यहाँ तक कि प्रमुख दलों के उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हो गई।

अपने राजनीतिक जीवन में उन्हें असफलताओं का भी सामना करना पड़ा। 1974 में वे गोविंद प्रसाद गैरोला से चुनाव हार गए और 1989 में ब्रह्म दत्त से संसदीय चुनाव में पराजित हुए। किंतु इन असफलताओं ने उनके संकल्प को कमजोर नहीं किया। वे अलग उत्तराखंड राज्य की माँग के प्रमुख नेताओं में से एक थे। 1979 से उन्होंने पृथक राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और पार्वती विकास परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।

अहिंसा में उनकी गहरी आस्था, सरल व्यक्तित्व और जनसमर्पण के कारण उन्हें “माउंटेन गांधी” की उपाधि मिली। उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाया और शांतिपूर्ण संघर्ष का मार्ग अपनाया। 18 अगस्त 1999 को ऋषिकेश के विठ्ठल आश्रम में उनका निधन हो गया। जीवन भर संघर्षों और चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, इंद्रमणि बडोनी उत्तराखंड के इतिहास में एक प्रेरणास्रोत और सम्मानित जननेता के रूप में सदैव याद किए जाते हैं।